Monday, 1 April 2013

ek koshish

मैं तुझसा नहीं, तुझे ही चाहता हुँ!
ये मेरा जिद् नही, मेरा जुनून है!!!

३१/०३/२०१३

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तुमने वादा किया था तोड़ने के लिये
मैंने वादा निभाया रिश्ता जोड़ने के लिये!!!


३०/०३/२०१३
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उनकी आँखों की बेबशी देखी नहीं जाती,
किसी को अपना बनाने का ऐसा नशा नहीं देखा!

३०/०३/२०१३
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आज फिर देखा खुद को आईने में,
चेहरा दिखा, पर इंसान नज़र न आया!


३०/०३/२०१३
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वाह! क्या मुलाक़ात थी,
कितनी सुहानी रात थी,
वो, मैं और न कोई बात थी,
हाथों में हाथ,
और वो मेरे साथ थी!

चुप वो भी थे, चुप मैं भी था,
दिल में उठा कोई तूफ़ान था,
इस चीज़ से जिस्म अनजान था,
पर दोनों का दिल बिमान था!

वाह! क्या मुलाक़ात थी,
बड़ी सुहानी रात थी!



29/०३/२०१३
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ये ज़ुल्फ़, तेरे चेहरे पर, पर्दा सा लगाती है,
अपने आफताब को मुझ तक पहुँचने दे!!!


२९/०३/२०१३
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वो किताबों के पन्ने पलट पलट दुनिया को दिखाती थी
पर मुझे ही पन्ने पलटने का सबब मालूम था!!!!!


२९/०३/२०१३
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