Monday, 25 March 2013
मोहे श्याम रंग भा गयो रे
मोहे श्याम रंग भा गयो रे
मोहे श्याम रंग भा गयो रे
मोहे कृष्ण प्रेम लग गयो रे
मोहे श्याम रंग भा गयो रे
अबकी होली खेलूं कन्हैया संग
लगाये मुझे वो प्रेम का रंग
मोहे अंग अंग
मोहे अंग अंग भिगो गयो रे
मोहे श्याम रंग भा गयो रे
मेरे मन में कान्हा
मेरे तन में कान्हा
हर कण कण में कान्हा
मोरे जीवन
मोरे जीवन में अपना रंग भर गयो रे
मोहे श्याम रंग भा गयो रे
मैं अज्ञानी, प्रेम क्या जानूं
बस, श्याम तुझे अपना मानु
मेरी साँसों में
मेरी साँसों में तेरा जिक्र आ गयो रे
मोहे श्याम रंग भा गयो रे
मोहे श्याम रंग भा गयो रे
मोहे श्याम रंग भा गयो रे
मोहे कृष्ण प्रेम लग गयो रे
मोहे श्याम रंग भा गयो रे
DDS
राजीव रोशन
२६/०३/२०१३
राधा संग कृष्ण और गोपियों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं .....
मोहे लाज़ लागत है!
न पकड़ो मेरी चुनरिया
मोहे लाज़ लागत है,
न भिगाओ मेरी चोली,
मोहे लाज़ लागत है!
तेरे हाथों में देखि पिचकारी,
मन में भय समावत है,
न पकड़ो मेरी चुनरिया,
मोहे लाज़ लगत है!
कान्हा, जो भीगी मोरी चुनरिया,
तंज़ कसेंगी गाँव की ग्वालिन
गर हुई मैं बदनाम,
मेरी इज्ज़त का तुम होगे जामिन
मत रोक मेरी डगरिया
मोहे लाज़ लागत है
न भिगाओ मेरी चोली
मोहे लाज़ लगत है!
तेरे रंगों में, मैं रंगना चाहूँ
पर ज़माने को मैं कैसे समझाऊँ
बस दिल को रंग दे प्यार की होली से
ना दूर चले जाना हमजोली से
मैं तेरे प्रेम में भई बावरिया
मोहे लाज़ लागत है
न भिगाओ मेरी चुनरिया,
मोहे लाज़ लागत है!
होली का रंग है प्रेम का,
प्रेम है मुझे तुमसे
होली का रंग है त्याग का,
त्याग स्वयं का तुमसे
तेरे प्रेम से भीग गयी तेरी गुजरिया
मोहे लाज़ लागत है
न भिगाओ मेरी चुनरिया
मोहे लाज़ लागत है!
न पकड़ो मेरी चुनरिया
मोहे लाज़ लागत है,
न भिगाओ मेरी चोली,
मोहे लाज़ लागत है!
DDS
राजीव रोशन
२६/०३/२०१३
राधा संग कृष्ण और गोपियों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं .....
कान्हा भिगो दे चोली हमारी
कान्हा मुरली छोड़, पकड़ ले पिचकारी
पिचकारी पकड़, भिगो दे चोली हमारी
तन रंग दे, मन रंग दे
अपने संसर्ग से जीवन रंग दे
कब तक हम ताकें राह तुम्हारी
हम ब्रज की गुजरिया, डाटेंगी मैया हमारी
प्रेम का रंग से भर दे जीवन म्हारी
कान्हा भिगो दे चोली हमारी,
कितने जन्म इंतज़ार किया,
तब आया है यह दिन
कैसे बताएं तुझे हम
कैसे कटे रात, कैसे काटे दिन
कान्हा होली की हो गयी सारी तैयारी
अब तो भिगो दे चोली हमारी
तेरी मुरली की धुन सुन
हम खो ना जाए कहीं,
सुध बुध न भुला बैठें
यशोदा मैया न आ जाए कहीं,
अब तेरे चरों में है जीवन हमारी
अब तो भिगो दे चोली हमारी
कान्हा मुरली छोड़, पकड़ ले पिचकारी
पिचकारी पकड़, भिगो दे चोली हमारी
कृष्ण - राधिका और ब्रज की सभी गोपिकाओं को होली की हार्दिक बधाई....
DDS
Rajeev Roshan
26/03/2013
Sunday, 24 March 2013
हैप्पी होली
ग़मों का दौर तो चलता ही रहेगा
ख़ुशी के पिटारे को खोल डालिए
चलिए इस बार भी हैप्पी होली बोल डालिए!
दुश्मनी और दोस्ती तो अंग है जीवन का
इनको पानी में रंगों की तरह घोल डालिए
चलिए इस बार भी हैप्पी होली बोल डालिए!
मोहब्बत की भूख तुम्हे भी है और मुझे भी,
गैरों के दामन पर प्यार के फूल डालिए
चलिए इस बार भी हैप्पी होली बोल डालिए!
मिले न कही ऐसा सुनहरा मौका अगली बार
अपने अहम् को गले मिलकर तोड़ डालिए
चलिए इस बार भी हैप्पी होली बोल डालिए!
बंधनों को तोड़, रिश्तों को जोड़
खुशियों की पतंग छोड़ डालिए
चलिए इस बार भी हैप्पी होली बोल डालिए!
दीवारें तो नाम की है, जरूरत तो अंजाम की है
चेहरे न दिखे रंगों में, ऐसा गुलाल मोल डालिए
चलिए इस बार भी हैप्पी होली बोल डालिए!
छोडिये अब तो नाराजगी मुझसे
एक रंग इश्क का तो बोल डालिए
चलिए इस बार भी हैप्पी होली बोल डालिए!
कोशिश है एक, बुरा न मानो होली है
बुरा लगे तो बोल डालिए
चलिए इस बार भी हैप्पी होली बोल डालिए!
राजीव रोशन
२५/०३/२०१३
प्रेरणा स्रोत हैं - मेरे प्यारे मित्रगण
यह कविता मेरे सभी मित्रों समर्पित है। इस शब्द के साथ की "बुरा ना मनो होली है", होली की दिल से हार्धिक बधाई एवं शुभकामनाएं !!!!!!!!!!
Saturday, 23 March 2013
एक तस्वीर
ख्वाबों में तेरा रोज़ आना जाना है
क्या मैं आज तेरी एक तस्वीर बना लूँ
तेरे होठों से निकले इकरार को माना है
क्या मैं तुझे अपनी तकदीर बना लूँ
निगाहों में तेरी अपने प्यार को पहचाना है
क्या मैं तुझे अपने जीवन की जंजीर बना लूँ
माना तुझे मुझसे बड़ी दूर जाना है
क्यूँ न तुझे पाने की मैं तदबीर बना लूँ
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राजीव रोशन
१७/०१/२०१३
क्यूँ सजदा करूँ
मैं क्यूँ सजदा करूँ उस खुदा का
जो मुझे नज़र आता नहीं
मैं तो सजदा करूँ मेरे सनम का
जिसके सदके खुदा से रूबरू होता हूँ
जब दर्द होता है तो मरहम लगाती है
जब ख़ुशी होती है मेरे संग मुस्काती है
जब आँख बंद करूँ मेरा ख्वाब सजाती है
जब आँख खोलूं सामने नज़र आती है
क्यूँ अदा करूँ फूल खुदा को
जब कद्र नहीं उसे खुशबू की
वो मुझे मेरे खुशबू से पहचान जाती है
जब मैं उसके करीब से गुजरता हूँ
जब नींद न आये यादों की लोड़ी बन जाती है
जब नींद आये तो यादो के फूलों से गुदगुदाती है
जब भूल जाऊं रास्ता, मंजिल की राह दिखाती है
जब मिल जाए मंजिल, नया लक्ष्य बताती है
क्यूँ पढूं गीता, कुरान और बाईबल
जब इनके अर्थ समझ आते नहीं
मैं तो पढता हूँ सनम के चेहरे को
जिसपर लिखी हर इबारत समझ लेता हूँ
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राजीव रोशन
१६/०१/२०१३
जो मुझे नज़र आता नहीं
मैं तो सजदा करूँ मेरे सनम का
जिसके सदके खुदा से रूबरू होता हूँ
जब दर्द होता है तो मरहम लगाती है
जब ख़ुशी होती है मेरे संग मुस्काती है
जब आँख बंद करूँ मेरा ख्वाब सजाती है
जब आँख खोलूं सामने नज़र आती है
क्यूँ अदा करूँ फूल खुदा को
जब कद्र नहीं उसे खुशबू की
वो मुझे मेरे खुशबू से पहचान जाती है
जब मैं उसके करीब से गुजरता हूँ
जब नींद न आये यादों की लोड़ी बन जाती है
जब नींद आये तो यादो के फूलों से गुदगुदाती है
जब भूल जाऊं रास्ता, मंजिल की राह दिखाती है
जब मिल जाए मंजिल, नया लक्ष्य बताती है
क्यूँ पढूं गीता, कुरान और बाईबल
जब इनके अर्थ समझ आते नहीं
मैं तो पढता हूँ सनम के चेहरे को
जिसपर लिखी हर इबारत समझ लेता हूँ
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राजीव रोशन
१६/०१/२०१३
मैं
मैं त्याग चूका अहं अपना
पर "मैं" त्याग न सका
जग गया था सूर्योदय संग
पर "मैं" जाग ना सका
दूर था अस्तित्व से अपने
पर "मैं" स्वयं से भाग ना सका
राजीव रोशन
२२/०३/२०१३
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