ख्वाबों में तेरा रोज़ आना जाना है
क्या मैं आज तेरी एक तस्वीर बना लूँ
तेरे होठों से निकले इकरार को माना है
क्या मैं तुझे अपनी तकदीर बना लूँ
निगाहों में तेरी अपने प्यार को पहचाना है
क्या मैं तुझे अपने जीवन की जंजीर बना लूँ
माना तुझे मुझसे बड़ी दूर जाना है
क्यूँ न तुझे पाने की मैं तदबीर बना लूँ
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राजीव रोशन
१७/०१/२०१३
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