Saturday, 23 March 2013

एक तस्वीर


ख्वाबों में तेरा रोज़ आना जाना है
क्या मैं आज तेरी एक तस्वीर बना लूँ

तेरे होठों से निकले इकरार को माना है
क्या मैं तुझे अपनी तकदीर बना लूँ

निगाहों में तेरी अपने प्यार को पहचाना है
क्या मैं तुझे अपने जीवन की जंजीर बना लूँ

माना तुझे मुझसे बड़ी दूर जाना है
क्यूँ न तुझे पाने की मैं तदबीर बना लूँ


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राजीव रोशन
१७/०१/२०१३

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